लेखनी प्रतियोगिता -आम आदमी है बेचारा

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आम आदमी है बेचारा आम आदमी है बेचारा, हरदम है परिस्थिति का मारा। उलझा रहता दाल रोटी में, आगे कहाँ सोचे बेचारा। ईमानदारी की रोटी खाता, छल कपट ना उसको भाता। ...

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