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महबूब का दीदार कर ख़ुदा को भूल जाना इश्क़ है, उसकी बेवफ़ाई पर भी उसे रुसवा ना कर पाना इश्क़ है। उसका इनकार या इक़रार दोनों को समझ जाना इश्क़ है, ...