हुआ है क़त्ल मगर कोई वार्दात नहीं (रुबाइ)

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वही हैं  लुत्फ़ो  -  करम अब  मगर वो बात नहीं,  मुझे   ख़बर  है मुहब्बत किसी   की  ज़ात  नहीं,  ये   तुझसे   छूटते    ही  क्या हुआ सियासत को; हुआ   है   क़त्ल   मगर ...

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