1 Part
339 times read
21 Liked
नियति चक्र *********** मेरी खुशियों का पारा सातवें आसमान पर था, क्योंकि जो मुझे मिला था वह मेरे लिए अभी भी स्वप्न जैसा महसूस हो रहा है, पर सच तो धरातल ...