ज़िन्दगी का रंग उतरे

1 Part

313 times read

15 Liked

जैसे जैसे उम्र गुज़रे ज़िन्दगी का रंग उतरे सोचता रहता हूँ तन्हा मुझमें भीतर कौन बिखरे संग बहते आँसुओं में खून के हैं चन्द कतरे मन का पंछी चाहे उड़ना पर ...

×