लेखनी कहानी -21-Sep-2022

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रात का चढ़ता नशा  और दिन उतरता खुमार  बुढ़ापे के मौज़ों में तब्दील हो गई  जवानी की  फसले बहार  साहिल से आ पड़ा वास्ता  तो छूट गई पीछे मझधार  खुद को ...

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