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नसीब लिखने बैठे थे खुदा खत्म हो गई स्याही मुझ तक आकर रुक्सत किये थे उन्होंने खुशिओं के बड़े काफिले रुक गई खुशिओं के आवाजाही मुझ तक आकर बाँटने निकले थे ...