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2122-1122-1212-22/112 सच न कहते जो ज़माने से डर गए होते, टूटकर आईने, कब के बिखर गए होते। ये तो अच्छा हुआ तूने पलट के देखा नहीं, वक़्त के पाँव भी वर्ना ...