आईने

0 Part

306 times read

6 Liked

2122-1122-1212-22/112 सच न कहते जो ज़माने से डर गए होते, टूटकर आईने, कब के बिखर गए होते। ये तो अच्छा हुआ तूने पलट के देखा नहीं, वक़्त के पाँव भी वर्ना ...

×