तेरे ख़्वाब

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कविता 221-2121-1221-212 आँखों से तेरे ख़्वाब निकाले न जाएंगे, साँचे में किसी और के ढाले न जाएंगे//1 आ दिल पे रख दे हाँथ कि मुझको सुकूँ मिले, जज़्बात मुझसे और सँभाले ...

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