लेखनी कहानी -21-Oct-2022 दैनिक प्रतियोगिता हेतु कविता मोह महकती नारी

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मोह महकती नारी नई नवेली दुल्हनिया जो कर बैठी षोडश श्रृंगार, मोह रही है सबका मन ज्यों लक्ष्मी का अवतार।  घर में जब से वह आयी है हो गया घर गुलजार,  ...

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