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ये कपड़े ●◆-------------- 🍁◆● कपड़े बोलो कब बस इस शरीर के ही आवरण है ये कपड़े तो जीवन सफर के अनेकानेक रूपांतरण हैं जन्मसहित ही नग्न शिशु जो माँ का आँचल ...