लक्ष्मी बाई के प्रति (तीन रुबाइयां)

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लक्ष्मी बाई के प्रति (तीन रुबाइयां)  ===================== आफ़ताब थी कभी वो माहताब थी,   थी बर्फ़ मगर जलती हुई आग थी!  तलवार से वह खिंचती शराब थी ; कोई बताए हक़ीक़त थी ...

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