जन्माष्टमी के अवसर पर प्रस्तुत कविता

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गोकुल की गलियों में रास रचाते गिरधारी माता यशोदा के लाल मेरे मदन मुरारी ग्वाल बाल के संग खेलें खेल बनवारी हर गलियों में बांसुरी बजाए ओ मेरे कृष्ण कन्हाई राधा ...

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