1 Part
75 times read
1 Liked
आईने में ख़ुद को निहारकर ख़ुद से ही फिर से मिलती हूँ मैं, दुनिया ने जो बतलाया उसके बारे में एक बार सोचती हूँ मैं, मेरी कमियों को ढूँढकर उसे सही ...