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गज़ल उफ़ ये बर्क़-ऐ-जमाल अच्छा है, तुम ने पूछा तो हाल अच्छा है,, ज़ख्म जी भर के दे मुझे जालिम, तेरे मुजरिम का हाल अच्छा है,, भागता है कहाँ बता मुझ ...