श्रृंगार छंद

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चंचल चितवन चंद्र चकोरी, बरसाने की नटखट छोरी, नैन मिला के नैन ते, कर गई मन की चोरी,, सौम्य सुरम्य वृषभान किशोरी, छेड़ तार उर की वीणा के, बांध रही है ...

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