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प्रतियोयिता विषय--स्वैच्छिक ग़ज़ल नज़र तुम्ही पर अटक रही है, ये बात सब को खटक रही है,, उधर दिखा है चमन में भंवरा, कली जहाँ पर चटक रही है,, जो ...