स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

11 Part

118 times read

5 Liked

वर्तमान के किसी भी अंधकार में केवल विवेक और आदर्श की रोशनी ही हमें राह दिखा सकती है। 'न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते' गीता का यह वचन हम पर बहुत ...

Chapter

×