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कविता:धन्य धन्य सावित्रीमाई फुले। आज जहाँ पर खड़े है हम यह तेरी बदौलत है सारी वर्ना चूल्हे तक ही सीमित रहती भारतीय नारी। शिक्षा पाकर हमने आज मुकाम किया है खड़ा ...