लेखनी प्रतियोगिता -17-Jan-2023

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राग की आकाश गंगा नग जड़े कंगन तुम्हारे, मोक्ष से ज्यादा ललित है प्रीत के बंधन तुम्हारे दीप जैसे तुम रखे थे  प्रेम की शुभ अल्पना पर इक उजाला झर रहा ...

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