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शिवरात्रि अखण्ड प्रचण्ड रुप तेरा असुरो का तू संहारी जटाओ में तेरे गंगा की धारा नंदी की है सवारी तू अविचल तू ही अविनाशी तू शक्ति तू भक्ति हे शिव शम्भू ...