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उड़नखटोला सा--दो शब्द राजीव रावत उड़नखटोला सा मन का भंवरा न जाने क्यों छत की उस मुंडेर पर बार बार मडराता है-- जहाँ तुम्हारे देह गंध की भीनी खुशबु सी ...