Gopal Gupta

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ग़ज़ल

हसीं शाम रंगीं घटा छोड़ आए।

हमी शहर ए उल्फ़त सजा छोड़ आए।।

रखा दिल पे पत्थर वफ़ा छोड़ आए।
सिसकते लबों पर दुआ छोड़ आए।।

मुहब्बत का सौदा लगा फिर भी सस्ता।
ज़माने कि सारी मता छोड़ आए।।

जुदा उन से होते समय दोस्तो हम
वही सब दुआ बद-दुआ छोड़ आए।।

हमारी बगावत उसूलों से थी बस।
ज़माना ये कहता खुदा छोड़ आए।।

  Gopal Gupta "Gopal "

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4 Comments

Radhika

19-Mar-2023 08:17 AM

Badhiya दुनिया बहुत कुछ केहती है हम उनकी बातें छोड़ आये

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Varsha_Upadhyay

18-Mar-2023 07:17 PM

शानदार

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