जूम कर रहा डीपी तेरी
जूम कर रहा डीपी तेरी
ऑख लगाती रहती फेरी ।
भले मुबाइल मेरी लगती
चित्र भरा रहता है तेरी ।।
जाने क्या एहसास हो रहा
जाने कोई पास आ रहा ।
जुल्फ बिखेरे अभी है आयी
ऐसा क्यों विश्वास हो रहा ।।
बिखरे केश होठ तक आते
लगता जैसे अमृत पाते ।
जैसे कोई फूल खिला हो
भौरे चुम्बन झुण्ड में पाते ।।
गोरे रंग से ज्यादा गोरी
लगती स्वर्गिक धरा की थोरी ।
देख-देख मन रोमांचित है
बार-बार गाता है लोरी ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र
आँचल सोनी 'हिया'
18-Apr-2023 12:27 AM
Anupam
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पृथ्वी सिंह बेनीवाल
25-Mar-2023 11:18 PM
शानदार
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ऋषभ दिव्येन्द्र
25-Mar-2023 01:52 PM
कमाल के अहसास
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