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Thanks Dr.Sahab
था आसान तेरा चुक जाना
भाषा : हिन्दी
भाषा - कोटि - : कविता
कीर्ति अनोखी भरा संकुचन
बात हदसे गुजर गयी होती
मन से पडा हूँ घायल
मन अशान्त हैअधियारा है
बडा आसान होता है दिलो का यूँ निगल जाना
गरीबी
वह चली हवा के झोके सी
स्वतंत्रता! कैसे पर्व मनाऊॅं
सहा दंश हमने है तुझको सहाया
गला रुधा है श्ब्द जुदा है
बेटी ---
गीत -- घनी चाँदनी - काली राते
बिटिया --
भोली जनता
तुम तो बहकी नदी लग रही हो
इतना ज्यादा प्यार करोगी
तूने सच्चा हिसाब कब जाना
मन की टूटी सवारी लिए रात भर
मन
रूप राशि
अच्छा था वह प्यारा बचपन
भ्रष्टचार
भ्रम-जाल
मन का वातावरण
घनघोर घटा
लोक तंत्र भ्रम जाल बना है
दमित हो गई सभी शाखाएं
दुनिया
बहुत पराजय लेकर बैठा
भोली भाली
चंचल
बेबसी
पहली आशा
तेरा
कोमल कर किसलय जैसे है
श्रवण के बंशज सावधान
मेहनत--
कली सुनो सकुचाओ मत यह जान लो
रेखा
रात-रात काटा है हमने
तुझे दर्द अपना सुनाया ही न था
हमारी
पनघट
मन मयूर
मेरा मन
प्रेम
काले -काले वस्त्र रेशमी
अधेरी रात
कितनी सुन्दर अदा
चाँद देखता
तेरा मन
शराबी
सच में तू सम्पत्ति किसी की
आप अगर हो गयी हो मेरी
सिन्दूर
अति घमंड में छोटी रचना
सैनिक
जूम कर रहा डीपी तेरी
अदब से प्यार करना जानता हूँ
पत्थर पूज रहा हूँ मै भी
सौन्दर्य की तू देवी हो
जय जय जय शंकर प्रिया,
आज भी तू वही कुमारी हो
भावना
शून्य
कोयल कलरव मीठी बोली
मै इतना आसान नही हूँ
स्वैच्छिक
साँस
मजबूरी
रूपसी तू
जुनून
ऐसा लगता है
सुकून
आँखो
गुलाबी
काली
होली
Zakirhusain Abbas Chougule
15-Jun-2023
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