रात-रात काटा है हमने
रात-रात काटा है हमने
जाने क्या-क्या देखा सपने ।
कहीं आनलाइन तू होती
नस-नस मेरी लगती जमने ।।
खूब तुम्हारी डीपी देखा
हाथो की तू बनती रेखा ।
जब उत्तर झट से न देती
माथे पर बल पडते देखा ।।
क्या तूझमे मै समझ न पाया
बार-बार कसमे हूँ खाया ।
जितना एटीट्यूड दिखाती
उतना अधिक मै गिरता पाया ।।
मै सपनो का राजकुमार
जाने क्या-क्या आया हार ।
तब तो पंख लगा उडता था
कहाँ -कहाँ धस जाता खार ।।
डॉ दीनानाथ मिश्र
Gunjan Kamal
09-Apr-2023 08:19 PM
👏👌
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ऋषभ दिव्येन्द्र
08-Apr-2023 11:15 PM
वाह
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