Gopal Gupta

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ग़ज़ल

मिरे यार की है जवानी  ग़ज़ल 
अदा की हया की निशानी ग़ज़ल,

न हो नाम शामिल तुम्हारा अगर,
मुकम्मल न रंगी-बयानी ग़ज़ल,,


नहीं और कुछ भी सनम जान लो,
तुम्हारी   हमारी   कहानी  ग़ज़ल,,

ज़रा जुल्फ लहरा-ओ जाने जिगर,
तुम्हें  देख  कर ही सजानी ग़ज़ल,,

तिरा हाथ हाथों में हमदम जो हो,
तो ये ज़िन्दगी हो  सुहानी ग़ज़ल,,

लिखू इस तरह भी तो अच्छा नहीं,
लगानी बुझानी छिपानी ग़ज़ल,,

कहो यार गोपाल अब की दफा,
लिखी किस लिए ये रूमानी ग़ज़ल
Gopal Gupta" Gopal "

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1 Comments

Sachin dev

13-May-2023 07:41 PM

लाजवाब

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