गंगा
नित नित मैली पिर्य पावनी गंगा होती जाए।
अपने भक्त जनों के पापो को ढोती जाएं ।।
इस कलयुग के मानव के हाथों से छलती जाएं
जय गंगे हर हर गंगे हो गंगे हर हर गंगे ।।
कचड़ा पहुँच रहा शहरों का नदिया नाली बनती जाए।
दिन दिन बढ़ते प्रदूषण से आस जींवन की मिटती जाए ।।
तेरी करनी से ये नदियाँ तिल तिल मरती जाए।
जय गंगे......................................गंगे।।
फिर भी तेरे पापो को ये गंगा ढोती जाएं ।
तेरी सुद्धि की खातिर खुद ही घटती जाएं।।
दीन हीन नारी सी इस की हालत होती जाए ।
फिर भी ये बलिहारी माँ अपना फर्ज निभाती जाएं।।
जय गंगे................................गंगे ।।
madhura
07-Jun-2023 12:34 PM
good
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Milind salve
16-May-2023 07:34 AM
बहुत खूब
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VIJAY POKHARNA "यस"
15-May-2023 04:28 PM
Nice 👍
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