गंगा

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नित नित मैली पिर्य पावनी गंगा होती जाए। अपने भक्त जनों के पापो को ढोती जाएं ।। इस कलयुग के मानव के हाथों से छलती जाएं जय गंगे हर हर गंगे ...

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