Gopal Gupta

Add To collaction

मधुशाला

मृगतृष्णा मुझ को भरमाती,
भरमाता उर छाला,
पास खड़ी साकी बाला है,
खाली लेकिन है प्याला,,
जितनी लगती पास मुझे है,
दूर है उतनी मधुशाला,,

जीवन के इस अनल तत्व से,
बहुत झड़ी मधुरिम हाला,,
 मौन खड़ी सब इच्छाएं है,
हाथों मे ले कर प्याला,,
दूर खड़ी बस है मुस्काती,
देख देख साकी बाला,,
बहुत तलाशा मगर मिली न,
बच्चन सी वो मधुशाला,,

  Gopal Gupta "Gopal "

   17
3 Comments

Mahendra Bhatt

29-Jun-2023 09:20 PM

👌👌

Reply

Gunjan Kamal

24-Jun-2023 11:54 PM

👏👌

Reply

वानी

24-Jun-2023 07:28 AM

Nice

Reply