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मृगतृष्णा मुझ को भरमाती, भरमाता उर छाला, पास खड़ी साकी बाला है, खाली लेकिन है प्याला,, जितनी लगती पास मुझे है, दूर है उतनी मधुशाला,, जीवन के इस अनल तत्व से, ...