Gopal Gupta

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ग़ज़ल

दर्द बढ़ने लगा गम सताने लगा
ये अंधेरा मुझे अब डराने लगा

ख़त्म होने लगा रोशनी का सफ़र ,
मुझ से साया मेरा  दूर जाने लगा,,

दिल के ज़ख्मों पे मरहम मुनासिब नहीं
गम मुझे देख कर मुस्कुराने लगा,,

और जीने कि हसरत जगी इस तरह,
खौफ़ आखों से निंदें चुराने लगा,,

अल विदा  मयकदा अल विदा ऐ जहां,
वक्त जाने का नजदीक आने लगा,,

खल रही थीं उजालों कि शायद कमी,
दिल मेरा इस लिए वो जलाने लगा ,,

भूल बैठा फ्कीरो का रुतबा है क्या,
चार पैसे जरा क्या कमाने लगा,

Gopal Gupta"Gopal"

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5 Comments

बहुत ही सुंदर और बेहतरीन अभिव्यक्ति

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Gunjan Kamal

20-Jun-2023 07:40 AM

👏👌

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वानी

16-Jun-2023 12:24 AM

Nice

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