ग़ज़ल

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दर्द बढ़ने लगा गम सताने लगा ये अंधेरा मुझे अब डराने लगा ख़त्म होने लगा रोशनी का सफ़र , मुझ से साया मेरा  दूर जाने लगा,, दिल के ज़ख्मों पे मरहम ...

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