Rajeev kumar

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संघर्ष

संघर्ष

न तो उसके गतिरोध की सीमा तय थी और न तो उसके विरोध की सीमा ही तय थी, इन चीजों का सिर्फ प्रारम्भ था, अन्त तो दुर-दुर तक दृष्टिगत नहीं थी।
एक दिन मेघा ने आत्मचितंन करने के तुरंत बाद विचारमंथन किया। विचार के मंथन का दृष्टिकोण, उसकी विचारवस्तू ,  रिश्तों में अपनत्व या वैर भाव का था।
विचारमंथन के पश्चात मेघा इस निष्कर्ष पर पहूंची कि विरोधियों में तो नब्बे प्रतिशत तो अपने ही लोग हैं, भले ही वो प्रकाश में नहीं आते मगर षड़यंत्र का अस्तित्व तो अपनों ने ही जिंदा कर रखा है। अंजान लोगांे को मेरे संघर्ष और मेरी सफलता से क्या वैर।
हरेश्वर राय ने अपनी बेटी मेघा से कहा ’’ बेटी, लोग तरह-तरह की बातंे कर रहे हैं। कह रहे हैं कि तुुम्हारी बेटी औकात से बढ़ कर सपना देख रही है। ’’
आत्मविश्वास से भरी मेघा ने सहमी हुुई आवाज में अपने पिता से कहा ’’ हाँ पापा जी, मैं  जो कर रही हूं, कुछ नया है, कुुछ हट कर है लेकिन इस में औकात से बढ़ कर सपना देखने वाली कौन सी बात है ? ’’
मेघा की एकटक ताकती नज़र अपने पिता से जवाब पाने के लिए उन पर टिकी रही और हरेश्वर राय जी की नज़र दिवाल घड़ी पे टिकी रही।
घड़ी की सुइयों की चाल और हरेश्वर राय जी की साँसांे की चाल सामान्य गति सेे चल रही थी।
’’ क्या जवाब दूं, गुस्साउं या हौसला बढ़ाउं की उधेड़बूंद  से बाहर निकलकर आश्वस्त होकर उन्होंनेे कहा ’’ ठीक है, जो बोलता है उसको बोलने दोे, तु अपना काम कर, बाकि मैं तुम्हारे साथ हूं। ’’
एक तो मेघा केे खुद का हौसला और उस पर पिताजी का भी हौसला, है कौन सा फासला जिसका सिमटना, फैसलेे के बाहर की चीज है।
‘‘ संघर्ष से समाधान, समाधान से सफलता के सोपान। ‘‘ मेघा ने इस सुक्ति का अपने अंदर कई बार दोहराया औेर खुद को समझाया कि जब सिर्फ अपनी परवाह करनी है बाकि किसी की परवाह नहीं करनी है।
’’ महारानी चली क्लकटरनी बनने। ’’ सुमति काकी की इस बात पर मेघा सिर्फ मुस्करा कर रह गयी।
नींद तो आती थी, फिर भी नींद आँखों से दुर, मगर जाना है जरूर। मेघा को तो सिलेेबस पूरी करने की धुन थी।
प्रथम बार असफल होनेे से भी वो हतात्साहित नहीं हुुई। उसने पढ़ा था कि असफलता ही सफलता की कुंजी है।
मेघा केे आज क्लकटर बन जाने के बाद सुमति काकी न तो प्रशंसा कर रही थी और न कटाक्ष ही कर रही थी। कुछ विरोधी तो आज भी नतमस्तक नहीं थे।
दुर-दराज से आए लोगों ने प्रशंसा की लरी लगा दी।
मेघा ने खुश होकर कहा ’’ सुमति काकी मैं तो क्लकटरनी बन गयी और शादी भी धुम-धाम से होगी और गर्व की खुशहाल जिंदगी होगी।
आपकी तरह दहेज के रूपए नहीं जुगाड़ करने पड़ेंगे।

समाप्त

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6 Comments

Rupesh Kumar

18-Dec-2023 07:33 PM

Nice

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Khushbu

18-Dec-2023 05:14 PM

Nyc

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Shnaya

17-Dec-2023 02:28 PM

Nice

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