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संघर्ष न तो उसके गतिरोध की सीमा तय थी और न तो उसके विरोध की सीमा ही तय थी, इन चीजों का सिर्फ प्रारम्भ था, अन्त तो दुर-दुर तक दृष्टिगत नहीं ...