Shailja Gupta

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मर्यादा


मर्यादा


मर्यादा की नदी के पार
हम न मिलेंगे यकीन मानो
उस किनारे जहां तुम खड़े हो
संबोधनों में न उलझना
रीत हम भी जानते हैं जग की

कुछ रिश्ते यूं ही निभा लिए जाए
तो  ऐतराज़ क्या है ?


शौहरत कदम चूमती रहे
तालियों के शोर में गुम न होना
बस इतनी सी ख्वाहिश है कि
मिलें  तो मुस्कुरा कर
ना भी मिलें तो कुछ गम नहीं
बस थोड़ी सी खुशी
कागज की कश्ती
इस किनारे......


शैलजा ☘️

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5 Comments

खूब लिखा आपने 👌👌

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Gunjan Kamal

22-Oct-2021 10:23 AM

Very nice 👌

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Zakirhusain Abbas Chougule

22-Oct-2021 10:12 AM

Nice

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