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लेखनी कहानी -16-Apr-2024

आंसू है,गम है,यास दिले दर्द मंद है। जो कह न सके लफ्ज़,लिफाफे में बंद है। ❤️ रखते नही हैं ख्वाहिशें गिलमानो हूर की। मैं उसको हूं पसंद वो मुझको पसंद है। ❤️ भूचाल सियासत में मचाएंगे अब चुनाव। जिन्नात आज कल कई बोतल में बंद हैं। ❤️ साया फिगन है सर पे मेरे दस्ते वालीदैन। उनका वजूद है तो मेरा सर बुलंद है। ❤️ आंसू है,दिल है,दर्द है दस्तार है"सगी़र" महबूब मेरे,तुझको बता क्या पसंद है।

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2 Comments

Mohammed urooj khan

22-Apr-2024 11:43 AM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Arti khamborkar

21-Apr-2024 03:12 PM

Awesome

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