लेखनी कहानी -12-Jan-2026
जिसको सब लोग हिंदी कहते हैं। उसको माथे की बिंदी कहते हैं।
मां से मीठी जुबान सीखी है। हिंदी मिश्री के जैसी मीठी है।
मां ने जब कान में रस घोला था। प्यार से हिंदी भाषा बोला था।
सुनना और बोलना पढ़ना लिखना। भाषा का सूत्र सबने बोला था।
मां से ही हिंदी सीखते हैं सब। प्यार की भाषा बोलते हैं सब।
इसकी उन्नति की चाह रखते हैं। प्रेम की हम निबाह रखते हैं।
सूर तुलसी कबीर और रसखान। जायसी प्रेम चंद सब हैं महान।
वो सुभद्रा हों या महादेवी । सबने भाषा को प्रेम है दे दी।
हिंदी गौरव है अपनी भाषा है। सारे भारत की इस से आशा है।
केश की लट संवारते हैं हम। मातृ भाषा पुकारते हैं हम।
दोहा और सोरठा,सवैया है। गेय है पद यहां गवैया है।
गीत है कविता और गजल भी है। हर विधा इसमें है सजल भी है।
ऐसी भाषा है जिसको बोलोगे। ज्ञान के सारे द्वार खोलोगे।
इसकी गहराई में यदि जाओगे। हीरे मोती भी इस में पाओगे।
देश में प्रेम जो बढ़ाना है। हिंदी भाषा को भी पढ़ाना है।
हिंदी भाषा से प्यार सब करना। सगीर इस पर निसार सब करना।
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी
Pranav kayande
17-Jan-2026 01:24 PM
Nice
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