लेखनी कहानी -12-Jan-2026
उजियारो का कत्ल हुआ अब अंधियारों का क्या कहना। घर की आंगन का बंटवारा अब दीवारों का क्या कहना।
जब दंगों की आग लगी सारी मोहब्बत झुलस गई। लाशें जली थी जिस नफरत में अंगारों का क्या कहना।
सच को कौन खरीदेगा अब कौड़ी के भी दामों में। झूठ जहां पर बिकते हो उन बाजारों का क्या कहना।
उन्हें हिकारत से मत देखो पले बढ़े जो बचपन से। जिसने फूलों को पाला था अब उन खारों का क्या कहना।
अपनो के संग जिन लोगों ने रहकर भी है दगा किया। देश में ऐसे लोग भी थे उन गद्दारों का क्या कहना।
सच्चाई की धार बनाओ अपने कलम के तेवर को। इंकलाब जो कलम से लाओ तलवारों का क्या कहना।
झूठे झूठे वादे करके जनता को बहलाते हैं। हम सग़ीर खुद बहलावे में सरकारों का क्या कहना।
Pranav kayande
17-Jan-2026 01:23 PM
Very good
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