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लेखनी कहानी -12-Jan-2026

अब कौन रिश्ता करता है किरदार देखकर। अब लोग प्यार करते हैं घर बार देखकर।

तसलीम नहीं करते हक़ीक़त को आज लोग । मानूस होते लोग , अदाकार देख कर।

अनमोल हो बे मोल न बिक जाना मेरे यार। बिकना अगर कभी भी खरीदार देख कर।

रहना वफ़ा परस्त, वफ़ा दार , गम ग़ुसार। करना किसी से इश्क तो इक बार देख कर।

मां-बाप को भी बोझ समझने लगे हैं लोग । बच्चे भी छोड़ बैठे हैं बीमार देखकर।

उसने कभी किसी से तलब कुछ नहीं किया। मैं खुद ही आया उसको तलबगार देख कर।

इखलास से "सगीर" यहां मिलता कौन है। सब भागते हैं वक्त की रफ्तार देख कर।

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1 Comments

Pranav kayande

17-Jan-2026 01:19 PM

Good

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