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लेखनी कहानी -12-Jan-2026

भरोसा तोड़ते हैं गै़र को हम राज़ करते हैं। बहुत से लोग हैं अपनों को ही नाराज़ करते हैं।

परों से उड़ नहीं सकता कोई भी आसमानों तक। परिंदे हौसलों के साथ अब परवाज़ करते हैं।

सुना है तुख्मे तासीरी किसी की भी नहीं जाती। कबूतर क्यों मगर करने लगे जो बाज़ करते है?

तेरी नज़रों के तरकश से कोई भी बच नहीं सकता। तुम्हारी आंख वह करती जो तीरंदाज करते हैं।

किसी को कुछ अगर बोलो तो उस अल्फ़ाज़ को तोलो। बहुत ही ज़ख्म गहरे दोस्तों अल्फ़ाज़ करते हैं।

नहीं मालूम है यह आजकल के हुक्मरानों को। बहुत से लोग मर कर भी दिलों पर राज करते हैं।

उन्हें ही याद रखती है "सगीर" यह अजब दुनिया। ज़माने से अलग कुछ, अपने जो अंदाज करते है।

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1 Comments

Pranav kayande

17-Jan-2026 01:16 PM

Awesome post

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