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लेखनी कहानी -12-Jan-2026

अब दर्द सहेंगे हम बिना बात कब तलक। छुप कर किया करेंगे मुलाक़ात कब तलक।

न कोई जुर्म मुझ पे न इलज़ाम कोई है। क्यों कैद ओ बंद मुझ पे, हवालात कब तलक।

अपने कदम बढ़ाओ रहे रास्त पर चलो। होते हैं ऐसे नेक खयालात कब तलक।

यादों के लिए ज़ख्म संभाले है अभी भी। रखेंगे अपने पास ये सौगात कब तलक।

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1 Comments

Pranav kayande

17-Jan-2026 01:14 PM

Amazing

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