लेखनी प्रतियोगिता -24-Dec-2021
You can not change your fate, NO MAN CAN
वह लगभग चीखते-चिल्लाते अपने कमरे से बाहर आ गया। कमरा कम, वह एक प्रयोगशाला ज्यादा लग रही थी। वह पिछले ४ साल से किसी न किसी शोध में व्यस्त था। उसकी चार साल की मेहनत आज रंग लाई। उसका चिल्लाना ही सब कुछ कह रहा था।
उसने टाइम मशीन की खोज कर ली थी। आज उसने एक ऐसी खोज पूरी कर ली थी जिसने कई वैज्ञानिकों को सालों तक हैरान कर दिया था। एटम के छोटेसे कण से टाईम ट्रेवल कर सकते है, इस सिद्धांत के साथ उसने प्रयोग किया था, और वह एटम को सबसे छोटे टुकड़ों में काटने में सफल रहा था। वह फिर से दुनिया को जीतने की आशा में चिल्लाया (उससे भी कुछ बड़ा), "I can change my fate, I can change my future।"
बचपन से ही एक वाक्य उसे परेशान कर रहा था, "You can not change your fate, No man can." इस वाक्य का उपयोग किसी गेम में भी किया जाता था। उसके हैरान मन ने इस वाक्य को मात दी थी। अब वह भविष्य में जा रहा था। ख़ुद का भविष्य दिखनेवाला था, उसे बदलने वाला था। क्योंकि उसके भाग्य ने उसे बहुत बार मात दी थी और अब उसकी बारी थी चेकमेट करने की।
टाइम मशीन की खोज में उसने एक सप्ताह तक स्नान भी नहीं किया था। अब जाकर उसने स्नान किया। आज रगड़ रगड़कर नहा कर वो भविष्य की सफर पर जानेवाला था।
पूरे दस मिनट नहाने के बाद वह अपने कमरे में लौट आया। सुबह का माहौल शांत और प्रसन्न था। उस शांत वातावरण में उसने खिड़की खोली और सूरज की रोशनी और भी प्रसन्नता लेकर आयी। दीवार पर लिखे वो अक्षर धूप में चमक रहे थे, "You can not change your fate, No man can।"
वह उन अक्षरों को देख मुस्कुराया। उसने मशीन के सारे बटन चालू कर दिए। मशीन की एक धीमी आवाज करते हुये शुरू हुई और उसी समय उसका दिल धड़कने लगा। वह उस मशीन के पारदर्शी कांच के प्लैटफॉर्म पर खड़ा हो गया। उसने मशीन पर समय डाला।
समय - "०९:१५:२१:००"
अवधि - १ सेकंड
दूरी: 24 घंटे
वर्तमान के एक सेकंड में, वह भविष्य में २० मिनट घूमकर आनेवाला था। उसने सामने के लाँच लिखे बड़े से लाल बटन को दबा दिया, मशीन की खटखटाहट के साथ ही उसकी धड़कन तेज हो गई। दूसरे ही क्षण में - नहीं नहीं - एटम का सबसे छोटा टुकड़ा उसी क्षण के 1/100,000वें भाग पर गिरा ........
....और वह एक हरी घास पर खड़ा था। उसने चारों ओर देखा। बच्चे इधर-उधर खेल रहे थे। झूले के बगल में बेंच पर बैठे बच्चों के दादा-दादी ... स्लाइडर पर खेलते बच्चे... उसे हैरानी से देख रहे थे। हवा धीरे-धीरे बह रही थी और घास और पेड़ों को गुदगुदी कर रही थी। उसने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी की ओर देखा, 09:15:20। पहले तो उसने सोचा कि वह बिना समय के पलायन कर गया है। क्योंकि वह बगीचा उसके घर के पास था। उसने पड़ोसी के दादा से तारीख के बारे में पूछा और दादाजी उसकी ओर देखने लगे।
वह पागलों की तरह घर की ओर भागा। वो दूसरा दिन था। उसकी भविष्य सफर यात्रा सफल रही थी। अब वह अपनी लैब जाना चाहता था। घर के पास की कुछ चीजें देखकर वह चौंक गया। उसके घर के चारों ओर "डू नॉट एंटर" की पीले रंग की टेप लगायी गयी थी। अगल-बगल का परिसर शांत था। उसने दरवाजा खोला और अंदर चला गया। अपने कमरे का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। उसकी कुर्सी पर खून लगा था। दीवार पर खून लगा था। कोई मारा गया या किसी की यहाँ हत्या कर दी गई। लेकिन उसे ठीक से पता नहीं था कि हुआ क्या था। क्या कोई उसके घर आया और किसी का खून कर गया..?
मेरे घर में क्या चल रहा है! "मुझे अभी पुलिस स्टेशन जाना चाहिए और जांच करनी चाहिए," उसने घर से बाहर निकलते हुए कहा। रास्ते में उसे वो बगीचा मिला। दादाजी को देखकर उन्हें समय की याद आ गयी। उसने अपनी घड़ी की ओर देखा और एक बार फिर पागलों की तरह घर की ओर भागा।
उसके बीस मिनट पूरे होनेवाले थे। आखिरी ३० सेकेंड बचे थे। क्योंकि वर्तमान में लौटने के लिए मूल स्थान पर लौटना आवश्यक था। यदि ऐसा नहीं होता, तो काल परिवर्तन में ग़लतियाँ होतीं। इसलिये वह पोलिस स्टेशन जाने की बजाए वापस घर की ओर भागा।
अंतिम २० सेकंड .... १५ सेकंड .... १० सेकंड ....
वह दौड़ ही रहा था। वह उस हत्या के बारे में सोचकर घर से बहुत दूर निकल आया था। फिर भी उसके मन में यह विचार कौंध रहा था। किसकी हत्या हुई होगी? मैंने किसी को क्यों मारा? उसके मन में विचारों ने अचानक एक अलग मोड़ ले लिया था।
आखरी ५ सेकंड.... सामने उसका घर और "डू नॉट एंटर" की पट्टियाँ दिखायी दे रही थीं। अब सिर्फ सड़क पार करने की देरी थी। उसके और घर के बीच की दूरी कम होती जा रही थी। उसने फिर से अपनी घड़ी की ओर देखा। अंतिम ३ सेकंड अभी भी थे। सामने अपने घर को देखकर उसकी गति धीमी हो गई। लेकिन जिन विचारों ने उसके दिमाग में एक अलग मोड़ ले लिया, इससे उसका सिर हिल रहा था।
... तभी उसके बाएं कान में ट्रक के हॉर्न की आवाज सुनाई दी। उसने आवाज की दिशा में देखा और कुछ ही सेकंड में वो दस फीट ऊँचा उड़ गया....
...और वह दर्दनाक दर्द औऱ खून से लथपथ अवस्था में अपनी कुर्सी से जा टकराया। इसी दौरान शरीर से निकले खून की छींटे दीवार से सन गयी।
आखरी सेकेंड खत्म करके अब वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था। मृत्यु के समय उसके मन में चल रहे हलचल पर पूर्ण विराम लग गया था, और साथ ही उसके जीवन पर भी.....
दीवार पर लगे अक्षर अब गीले लाल रंग में चमक रहे थे-
"You can not change your fate, No Man Can"
समाप्त
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#लेखनी कहानी सफर
#लेखनी प्रतियोगिता
©® दत्ता उतेकर
PHOENIX
12-Jan-2022 07:36 PM
Brilliant ekdam nayi kahani lekar aye ho pkbhai
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Seema Priyadarshini sahay
28-Dec-2021 05:52 PM
Amazing...!!!
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Farhad ansari
25-Dec-2021 08:38 PM
Impressive
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pk123
26-Dec-2021 07:04 PM
Thanks
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