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बहसें फ़ुजूल थीं यह खुला हाल देर से ||अकबर इलाहाबादी
भाषा : हिन्दी
भाषा - कोटि - : शायरी
दूर तक याद-ए-वतन आई थी समझाने को|| राम प्रसाद बिस्मिल
भाषा : हिन्दी
भाषा - कोटि - : कविता
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