Kavita Jha

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कली(दोहा)# लेखनी दैनिक काव्य प्रतियोगिता प्रतियोगिता -22-Apr-2022

कली (दोहा)

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नन्ही कली बगान की, तोड़ कुचलता आज।
कैसी है यह वेदना, किसका हुआ समाज।।
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अपनी बगिया में खिली, कली बने इक फूल।
महकाए घर आँगना, तोड़ करो मत भूल।।
***
मात-पिता की लाडली, उससे घर की साज।
छोटी सी प्यारी कली, चली ससुराल आज।।
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कविता झा'काव्या कवि'
22.04.२०२२
#लेखनी
##लेखनी दैनिक काव्य प्रतियोगिता 

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12 Comments

Punam verma

23-Apr-2022 04:07 PM

Nice one

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Abhinav ji

22-Apr-2022 11:40 PM

Very nice

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Gunjan Kamal

22-Apr-2022 09:54 PM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌👌

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