बेताबी
चाँद जब आसमाँ पर निकलता है
मन विरह से विकल हो जाता है
प्रकृति जब सुरमई शाम पर
रात का आँचल टाँकती है
सितारे बिख़र जाते आसमाँ पर
रात अपने होने पर इठलाती है
सहर तक फिर चाँद सितारे
आँख मिचोली खेलते हैं
मन तब तुम्हारे आने की
आस संजोता है
दिल बेताब हो मचल मचल जाता है
मन घबराता है फिर संभल जाता है
सारी सारी रात चाँद से तुम्हारी
बातें होती हैं
मन की हर बेताबी चाँद को सुना देती हूँ
जो कहा सुना नही किसी से वो भी बतला देती हूँ
इन निर्मम रातों में प्रतीक्षारत हूँ
जानती हूँ कोई और नही है
पर तुम संग हो
शहला जावेद
मनीषा अग्रवाल
06-Jul-2021 10:42 PM
बहुत सुंदर भाव 👌👌👌
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Swati chourasia
06-Jul-2021 09:18 PM
Very beautiful 👌
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Kshama bajpai
06-Jul-2021 09:17 PM
Wahhh..ji wah❤👌👌
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