जन्माष्टमी



बहा दो प्रेम की,गंगा
मेरे नंदलाल आये है,
मिटा दो व्यर्थ की शंका
मेरे नंदलाल आये हैं,

होठों पर बांसुरी उनके 
कदम की डाल के नीचे
सांवली मोहिनी मूरत
पहन पीताम्बरी काया,
सजा दो घर को मन्दिर सा
मेरे नंदलाल आये हैं,

यशोदा मां के प्यारे हैं
नंद बाबा के दुलारे है,
चरावें ग्वालों संग गइया
जगत के पालन हारे हैं,
लगाओ भोग माखन का
मेरे नंदलाल आये हैं,

प्रभु तो भाव के भूखे,
प्रेम सदभाव के भूखे,
कालिया नाग को नाथा
कंस को मार ,जग साधा
मिटा दो द्वेष सारे अब मेरे
नंदलाल आये हैं,

रचाया रास मधुवन में,
राधिका संग कान्हा ने,
गोपियों को भी नचाया था
राधिका संग कान्हा ने,
चलो सब झूम लो,गालो
मेरे नंद लाल आये हैं,

रहे यमुना के तट फिर भी,
सकल ब्रम्हांड के स्वामी
सभी नजरों में हैं उनके
धन वान या निर्धन सब भाव से
बोलो मेरे। नंदलाल आये हैं,

दिया उपदेश अर्जुन को,
बने थे सारथी उनके,
सिखाया ज्ञान गीता का,
अमर है आत्मा सबकी,
करा लो पार सब नइया मेरे
नंद लाल आये हैं,

होकर के ईश्वर भी,माखन
चोर कहलाये,महा वीर होकर
भी,प्रभू रण छोर कहलाये, खुद
वरदान होकर भी,श्राप कुन्ती का
ले आये,सब जयघोष से बोलो मेरे
नंदलाल आये हैं,
सन्तोषी दीक्षित कानपुर
आप सभी को, जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनाएं व बहुत बहुत बधाई,
जय कन्हैयालाल की🙏🙏🌹🌹💐💐

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11 Comments

Chetna swrnkar

21-Aug-2022 01:06 PM

Bahut sundar rachna

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👌🏼 👌🏼 👌🏼 वाह बहुत ही खूबसूरत रचना और भावनात्मक Outstanding Speechless Superrr से भी बहुत बहुत बहुत uperrrr

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Seema Priyadarshini sahay

20-Aug-2022 02:56 PM

बहुत खूबसूरत

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