मारुतिनंदन
विषय:- "मरूतिनंदन"
केशरी के लाला, अंजनी के बाला।
हमारे ये संकट ,तुम जरा हर लो।।
भटकते भटकते , है आए कहा से।
दर पर तुम्हारे, हम भिख मांगते।।
हुई है हमसे , वो सारी गलतियां।
हम उनके लिए, है छमा मांगते।।
सब कृत्य छोड़कर, जीवन भक्ती मैं मोड़कर।
दर पर तुम्हारे, हम मोक्ष लेने आए।।
मन को मिली है , सुकून की शांति।
मोह माया छोड़कर, तुम्हारे दर है आए।।
केशरी के लाला, अंजनी के बाला।
हमारे ये संकट ,तुम हर लो बाबा।।
कविश्री रोशन जी
(8269105818)
Hayati ansari
29-Nov-2021 10:03 AM
Good
Reply
Arman
26-Nov-2021 11:48 PM
Nice
Reply
Hayati ansari
26-Nov-2021 10:25 PM
Nice
Reply