Gopal Gupta

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Gazzal

      ग़ज़ल 
बिछा के दिल की बिसात बैठा,,
लगा के बाजी हयात बैठा,,

वही पुरानी ले बात बैठा ,
उदास तन्हा वो रात बैठा,,

उसे मिलेगी कहाँ से मंजिल,
जो भूल अपना सिरात बैठा,,

पिला दें आँखों के आज साकी,
ग़मो से पाने निजात बैठा,,

फ़तह तुम्हारी तुम्हे मुबारक,
में खा के चाहत मे मात बैठा,,

वफ़ा जफ़ा जिन्दगी जमाना,
सजा के हर्फ़-ऐ-लुग़ात बैठा,,

वफ़ा से खाली रहा है दामन,
वही है देने ज़कात बैठा,,
Gopal Gupta Gopal 

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4 Comments

Varsha_Upadhyay

08-Dec-2022 08:36 PM

बहुत खूब

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Aditi “Noorie” Jain

07-Dec-2022 10:03 AM

Nice

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